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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

दक्षिणा काली द्वाविंशत्यक्षरी (22-अक्षरी) महामंत्र

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारदशमहाविद्या मूल महामंत्र
स्वरूपदक्षिणा काली
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

'क्रीं' (काली बीज), 'हूँ' (कूर्च-रक्षा), 'ह्रीं' (माया-ज्ञान)। हे दक्षिणा काली! मेरे अज्ञान का नाश कर मुझे पूर्णता प्रदान करें (स्वाहा)।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अहंकार का नाश, मोक्ष और सर्वोच्च तांत्रिक सिद्धियां

विस्तृत लाभ

अहंकार का नाश, मोक्ष और सर्वोच्च तांत्रिक सिद्धियां।

जप काल

गुरु-दीक्षा अनिवार्य। श्मशान या एकांत स्थान पर।

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