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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्वेताश्वतर ध्यान मंत्र

क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारऔपनिषदिक मोक्ष मंत्र
स्वरूपहर (अविनाशी शिव)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

प्रकृति नाशवान है, परंतु भगवान 'हर' (शिव) अमर और अविनाशी हैं। उस एक ही देव का निरंतर ध्यान करने और उनसे योग स्थापित करने से अंत में समस्त विश्व-माया की निवृत्ति हो जाती है 51।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

माया के बंधनों से पूर्ण निवृत्ति और कैवल्य मोक्ष की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

माया के बंधनों से पूर्ण निवृत्ति और कैवल्य मोक्ष की प्राप्ति 51।

जप काल

ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान करते हुए।

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