शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सेनापति स्तुति (द्वितीय अनुवाक)
नमो हिरण्यबाहवे सेनान्ये दिशां च पतये नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक स्तुति
स्वरूपहिरण्यबाहु (स्वर्णिम भुजाओं वाले)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्वर्णिम भुजाओं वाले, सेनापति और दिशाओं के स्वामी भगवान रुद्र को नमस्कार है 40।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दिशाओं से आने वाले भय का नाश, और नेतृत्व क्षमता (Leadership) का विकास
विस्तृत लाभ
दिशाओं से आने वाले भय का नाश, और नेतृत्व क्षमता (Leadership) का विकास 37।
जप काल
यात्रा पर जाने से पूर्व।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भूधराधीशाय नमः।
कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु। (अर्थ: कवियों की जिह्वा में बसने वाली देवी पश्चिम में रक्षा करें) 8
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं आद्य लक्ष्म्यै नमः।
पाशाङ्कुशापूप कपित्थजम्बू फलं तिलान् वेणुमपि स्वहस्तैः । धृतः सदासौ तरुणः अरुणाभः पायात्सयुष्मान् तरुणो गणेशः ॥
ॐ ईशानाय नमः
ॐ वेदवेद्याय नमः