महामारी एवं रोग-शोक नाश मंत्र
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
प्रसन्न होने पर आप सभी रोगों को नष्ट कर देती हैं और रुष्ट होने पर सभी मनचाही कामनाओं को। जो आपकी शरण में हैं, उन पर विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे अन्यों को आश्रय देने वाले बन जाते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
गंभीर बीमारियों, महामारियों और शारीरिक-मानसिक कष्टों से त्वरित मुक्ति
विस्तृत लाभ
गंभीर बीमारियों, महामारियों और शारीरिक-मानसिक कष्टों से त्वरित मुक्ति 32।
जप काल
रोगी के सिरहाने बैठकर या जल को अभिमंत्रित कर पिलाने की विधि।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अञ्जनीसुताय नमः
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
ॐ महाविद्यायै नमः
द्विषड्भुजं द्वादशदिव्यनेत्रं त्रयीतनुं शूलमसिं दधानम् । शेषावतारं कमनीयरूपं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ कादम्बरीपानरतायै नमः
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥