शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ शुचये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपनिष्पाप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अग्नि के समान निर्मल और पूर्णतः पवित्र हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पवित्रता
विस्तृत लाभ
पवित्रता
जप काल
स्नानोपरांत
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौः जगत्प्रसूत्यै नमः।
चोदयित्री सूनृतानां चेतन्ती सुमतीनाम्। यज्ञं दधे सरस्वती॥
ॐ भारद्वाजस्तुताय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ मातङ्ग्यै नमः
ॐ ज्वालामालिने नमः