त्रिगुण-अतीत योग मंत्र
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
आप तीनों गुणों, तीनों शरीरों और तीनों कालों से परे हैं। आप नित्य मूलाधार चक्र में स्थित हैं। आप तीन शक्तियों वाले हैं और योगी नित्य आपका ध्यान करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
कुंडलिनी जागरण, चक्रों का शुद्धिकरण और योग सिद्धि
विस्तृत लाभ
कुंडलिनी जागरण, चक्रों का शुद्धिकरण और योग सिद्धि।
जप काल
कुंडलिनी ध्यान और मूलाधार चक्र पर एकाग्रता के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वेदवेदान्तयज्ञेशं ब्रह्मरुद्रादिवन्दितम्। श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं आद्य लक्ष्म्यै नमः।
ॐ अनूपमायै नमः
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
ॐ पिङ्गलाय नमः
ॐ कुमारीपूजनप्रीतायै नमः