अष्टरूप ब्रह्म मंत्र
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
आप वाणीमय, चिन्मय (चेतना), आनंदमय और ब्रह्ममय हैं। आप अद्वितीय सच्चिदानंद हैं, आप ही प्रत्यक्ष ब्रह्म हैं और आप ही ज्ञान व विज्ञान से युक्त हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
बौद्धिक विकास, तनाव से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान
विस्तृत लाभ
बौद्धिक विकास, तनाव से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान।
जप काल
प्रातःकालीन ध्यान और ज्ञानार्जन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विद्या तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
ॐ बलवते नमः
ॐ स्वधायै नमः