शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
युद्ध/प्रतिस्पर्धा में पूर्ण विजय हेतु मंत्र (आदित्य हृदयम)
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यमक्षय्यं परमं शिवम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारविजय स्तोत्र-मंत्र
स्वरूपसूर्यवंशी राम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यह आदित्य हृदय अत्यंत पुण्यदायी, समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला, विजय दिलाने वाला, अक्षय और परम कल्याणकारी है; इसका नित्य जप करना चाहिए।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सभी प्रकार के बाह्य और आंतरिक शत्रुओं का विनाश और शाश्वत विजय की प्राप्ति
02
स्वयं अगस्त्य मुनि ने राम को रावण-वध से पूर्व युद्धभूमि में इसका उपदेश दिया था
विस्तृत लाभ
सभी प्रकार के बाह्य और आंतरिक शत्रुओं का विनाश और शाश्वत विजय की प्राप्ति। स्वयं अगस्त्य मुनि ने राम को रावण-वध से पूर्व युद्धभूमि में इसका उपदेश दिया था 13।
जप काल
अत्यंत कठिन प्रतिस्पर्धा या संकट के समय सूर्य की ओर मुख करके।
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