शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
जिह्वाग्रे वासिनी मन्त्र (सरस्वती स्तवराज)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी मम जिह्वाग्रे सरस्वती स्वाहा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवाक्-सिद्धि मन्त्र
स्वरूपवाग्वादिनी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ऐं ह्रीं क्लीं बीज स्वरूपा, हे वाग्वादिनी सरस्वती! आप मेरी जिह्वा के अग्र भाग पर निवास करें और मेरे द्वारा सत्य का वाचन कराएं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
1800 बार नित्य जप करने से जिह्वा पर साक्षात् सरस्वती का वास होता है और व्यक्ति जो कहता है, वह सत्य हो जाता है (वाक् सिद्धि)
विस्तृत लाभ
1800 बार नित्य जप करने से जिह्वा पर साक्षात् सरस्वती का वास होता है और व्यक्ति जो कहता है, वह सत्य हो जाता है (वाक् सिद्धि)।
जप काल
नित्य 1800 जप (रुद्राक्ष या स्फटिक माला से)।
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