शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ अव्यक्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनिराकार रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो निराकार और अप्रकट रूप में भी सर्वत्र उपस्थित हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अदृश्य और अज्ञात संकटों (जिनके विषय में साधक को पता भी न हो) से रक्षा
विस्तृत लाभ
अदृश्य और अज्ञात संकटों (जिनके विषय में साधक को पता भी न हो) से रक्षा।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥ 18
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥
ॐ यज्ञरूपाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गज लक्ष्म्यै नमः।
नारिकेलानम्र कदली गुड पायस धारिणम् । शरच्चन्द्र वपुषं भजे भक्त गणपतिम् ॥
ॐ क्रूराय नमः