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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 8

भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

भूतों के नायक और काशी वासियों के पाप-पुण्य का शोधन करने वाले कोतवाल को नमन है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

विशाल कीर्ति (प्रसिद्धि) की प्राप्ति और पाप-पुण्य का शोधन

विस्तृत लाभ

विशाल कीर्ति (प्रसिद्धि) की प्राप्ति और पाप-पुण्य का शोधन 36।

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