ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कार्तिकेय मंत्र

ॐ दैत्यकालाय नमः।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारराजसिक संपदा मंत्र
स्वरूपस्वर्णाकर्षण भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो दैत्यों और नकारात्मक शक्तियों के काल हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति

जप काल

शुक्रवार को यंत्र पर कुमकुम अर्पण

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥

य इदं कवचं श्रीदं पठेद्विष्णुप्रियात्मकम्। त्रैलोक्यं विजितं तेन येन वा धारितं भवेत्॥

ॐ कृपामय्यै नमः

ॐ विश्ववन्द्यायै नमः

ॐ वल्ली देवसेनासमेत श्री सुब्रह्मण्यस्वामिने नमः

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।