शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ दुर्गमापहायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो दुर्गम बाधाओं को दूर धकेल देती हैं।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आलिङ्ग्य देवीं हरितां निषण्णां परस्परश्लिष्ट कटौ निविश्य । सन्ध्यारुणं पाशसृणीं वहन्तं भयापहं शक्ति गणपतिमीडे ॥
ॐ महागुरवे नमः
विष्णवे जिष्णवे महाविष्णवे प्रविष्णवे महेश्वराय
ॐ क्लीं ॐ श्रीं विजय लक्ष्म्यै नमः।
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ नागभूषणाय नमः