शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ दुर्ज्ञेयाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपदुर्ज्ञेय रहस्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके परम रहस्य को साधारण बुद्धि से जानना असंभव है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विनम्रता
विस्तृत लाभ
विनम्रता
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
ॐ गजाननाय नमः
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
ॐ कुलपद्मिन्यै नमः