शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ द्वैमातुराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र
स्वरूपद्वैमातुर
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मातृ-पक्ष से सुख और वात्सल्य की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मातृ-पक्ष से सुख और वात्सल्य की प्राप्ति
जप काल
नाम जप।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भ्रूयुगं शशिशोभना पातु।
ॐ ऊर्ध्वरूपाय नमः
ॐ कामपीठविलासिन्यै नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
दक्षिणे चंड भैरवाय नमः दक्षिणे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ शाश्वताय नमः