ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

ब्रह्मणस्पति सूक्त

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
स्वरूपब्रह्मणस्पति / गणपति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे देवों के देव, हम आपका आवाहन करते हैं। आप ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं, जिनकी कीर्ति अतुलनीय है। हे मंत्रों के स्वामी ब्रह्मणस्पति, हमारी प्रार्थना सुनकर हमारे यज्ञ स्थल में विराजमान हों।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

ज्ञान, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और सभी प्रकार के अनुष्ठानों में निर्विघ्नता

विस्तृत लाभ

ज्ञान, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और सभी प्रकार के अनुष्ठानों में निर्विघ्नता।

जप काल

किसी भी शुभ कार्य, विद्यारंभ या वैदिक अनुष्ठान के आरंभ में।

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