शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ गोविन्दाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपगोविंद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मन को शांत और अभय करने वाले को नमन।
जप काल
दुःस्वप्न (Nightmares) आने पर
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विष्णवे नमः।
विष्णुप्रिये! रत्नगर्भे! समस्तफलदे शिवे! त्वद्गर्भगतहेमादीन् सम्प्रदर्शय दर्शय॥
ॐ प्रमुखाय नमः
कराभ्यां परशुं चापं दधानं रेणुकात्मजं। जामदग्न्यं भजे रामं भार्गवं क्षत्रियान्तकं॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
ॐ तुलसीदामभूषणाय नमः