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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

जया दुर्गा (अर्गला) विजय मंत्र

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारविजय मंत्र / स्तोत्र मंत्र
स्वरूपनवदुर्गा एवं दशमहाविद्या
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा नामों से प्रसिद्ध हे जगदम्बे! आपको मेरा नमस्कार है 17।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जीवन के हर क्षेत्र में विजय, पापों का शमन, उत्तम स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा

विस्तृत लाभ

जीवन के हर क्षेत्र में विजय, पापों का शमन, उत्तम स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा 30।

जप काल

विशेष साधना, दुर्गा पूजा के आरंभ में पुष्पांजलि के समय।

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