शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
जीवातुश्च मे दीर्घायुत्वं च मेऽनमित्रं च मेऽभयं च मे...
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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टिप्पणी
मुझे दीर्घायु, शत्रुओं का अभाव और निर्भयता प्राप्त हो
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
विष्णुप्रिये! रत्नगर्भे! समस्तफलदे शिवे! त्वद्गर्भगतहेमादीन् सम्प्रदर्शय दर्शय॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं भगवति भवानि देवि स्वाहा॥
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ विश्वस्मै नमः
ॐ कामदाय नमः
ॐ महाभुजाय नमः