शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआद्या काली नाम-मंत्र
स्वरूपआद्या काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कलियुग के दोषों और पापों का नाश करने वाली।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कलियुग के ताप, दोषों और मलिनता से शुद्धि
विस्तृत लाभ
कलियुग के ताप, दोषों और मलिनता से शुद्धि।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
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ॐ वाग्मिने नमः
ॐ महावीराय नमः
स्वदन्त पाशाङ्कुश रत्नपात्रं करैर्दधानो हरिनीलगात्रः । रक्तांशुको रत्नकिरीटमाली भूत्यै सदा मे द्विमुखो गणेशः ॥
या श्रद्धा धारणा मेधा वाग्देवी विधिवल्लभा। भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी॥
ॐ ह्रीं बटुकाय मम मनोवांछित कार्य सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।