कार्तिकेय मंत्र
ॐ कमलालयामध्यस्थायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कमल के बिल्कुल मध्य भाग में प्रतिष्ठित रहने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
आज्ञा चक्र या अनाहत चक्र में देवी का ध्यान केंद्रित होना
विस्तृत लाभ
आज्ञा चक्र या अनाहत चक्र में देवी का ध्यान केंद्रित होना।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अक्षोभ्याय नमः
ॐ शान्ताय नमः।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिंसीः पुरुषं जगत्॥
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
ॐ कामविमोहनाय नमः