शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ कमनीयविभूषणायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआद्या काली नाम-मंत्र
स्वरूपआद्या काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका नैसर्गिक सौन्दर्य ही उनका सबसे बड़ा आभूषण है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
बाह्य आभूषणों की आवश्यकता से परे आत्म-सौन्दर्य का बोध
विस्तृत लाभ
बाह्य आभूषणों की आवश्यकता से परे आत्म-सौन्दर्य का बोध।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
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ॐ पञ्चवक्त्राय नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥
ॐ परमधाम्ने नमः
ॐ वृषाकपये नमः
ॐ चिरञ्जीविने नमः