शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ करौ मे देववरदो नृसिंहः पातु सर्वतः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदोनों हाथ / देव-वरद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देवताओं को वर देने वाले नरसिंह मेरे दोनों हाथों की सब ओर से रक्षा करें। (कर्म-कौशल में वृद्धि)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥
ॐ मूर्त्यै नमः
ॐ पावकात्मजाय नमः
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
ॐ नागाय नमः
ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः