शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री दुर्गा गायत्री मंत्र
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपदुर्गा / कात्यायनी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम महर्षि कात्यायन की पुत्री माँ दुर्गा को जानते हैं, उन कन्याकुमारी का हम ध्यान करते हैं, वे देवी दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें 27।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान का नाश, उच्च आध्यात्मिक ज्ञान, साहस, और दैवीय मार्गदर्शन की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अज्ञान का नाश, उच्च आध्यात्मिक ज्ञान, साहस, और दैवीय मार्गदर्शन की प्राप्ति 24।
जप काल
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से जप।
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