शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अथर्वशीर्ष मूल तत्त्व मंत्र
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतत्त्व दर्शन मंत्र
स्वरूपपरब्रह्म स्वरूप गणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे गणपति, आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्त्व हैं, आप ही एकमात्र कर्ता, धर्ता और हर्ता हैं। आप ही यह संपूर्ण ब्रह्मांड हैं और आप ही नित्य आत्मा हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मज्ञान, आध्यात्मिक सिद्धि और परब्रह्म-साक्षात्कार की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
आत्मज्ञान, आध्यात्मिक सिद्धि और परब्रह्म-साक्षात्कार की प्राप्ति।
जप काल
मानसिक शांति और ध्यान की गहराई में प्रवेश करते समय।
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