वृक्षाधिपति स्तुति
नमो वृक्षेभ्यो हरिकेशेभ्यः पशूनां पतये नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हरे पत्तों रूपी बालों वाले वृक्षों के रूप में विद्यमान और पशुओं के स्वामी भगवान रुद्र को नमन है।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रकृति से जुड़ाव, पशु-धन की रक्षा, और पर्यावरण का शोधन
विस्तृत लाभ
प्रकृति से जुड़ाव, पशु-धन की रक्षा, और पर्यावरण का शोधन 37।
जप काल
वन या उद्यान में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कङ्कालिने नमः।
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ सर्वायुधविशारदाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ गोविन्दाय नमः