शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ नित्यगतायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सर्वत्र (नित्य) व्याप्त और गमन करने वाली हैं, उन्हें नमन 18।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मायाधराय नमः
ॐ कर्पूरसागरस्नातायै नमः
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मने नमः।
ॐ दण्डधारकाय नमः
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8