पावका नः सरस्वती (सरस्वती सूक्त)
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पवित्र करने वाली, अन्न तथा बल से युक्त और बुद्धि रूपी धन वाली माँ सरस्वती हमारे इस यज्ञ (ज्ञान-साधना) को स्वीकार करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन और विचारों की शुद्धि, लौकिक शिक्षा के साथ पारलौकिक ज्ञान की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) से जुड़ाव
विस्तृत लाभ
मन और विचारों की शुद्धि, लौकिक शिक्षा के साथ पारलौकिक ज्ञान की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) से जुड़ाव।
जप काल
प्रातःकाल, यज्ञ या विद्यारंभ संस्कार के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विष्णुपत्न्यै नमः ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः।
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ हरीश्वराय नमः
ॐ चतुरात्मने नमः
ॐ वासुदेवाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये चन्द्रः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः