शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ पितृस्तुताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपस्तुत्य-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जन्म-काल में ही पिता द्वारा जिनकी स्तुति की गई, उन्हें नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सम्मान और प्रतिष्ठा हेतु
विस्तृत लाभ
सम्मान और प्रतिष्ठा हेतु
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
ॐ रां रां
बुद्धिविच्छिन्नचैतन्यमेकं पूर्णमथापरम्। आभासत्वपरं बिम्बभूतमेवं त्रिधा चितिः॥
ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥
ॐ विधात्रे नमः