शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ प्रसन्नात्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपप्रसन्न-चित्त
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सदैव प्रसन्न, मुस्कुराते हुए और आनंदित रहने वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दिव्यहासायै नमः
ॐ शङ्करात्मजाय नमः
ॐ वैद्याय नमः।
ॐ कपालार्घ्यवरोद्यतायै नमः
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥