शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र
शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 3
स्वरूपगुह / सनत्कुमार
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शब्द-ब्रह्म के समुद्र, सिद्ध, सारस्वत, गुह, सनत्कुमार भगवान भोग और मोक्ष दोनों देते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सांसारिक भोग व अंतिम मोक्ष की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सांसारिक भोग व अंतिम मोक्ष की प्राप्ति।
जप काल
ध्यान साधना के पूर्व।
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