ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र

शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारश्लोक 3
स्वरूपगुह / सनत्कुमार
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

शब्द-ब्रह्म के समुद्र, सिद्ध, सारस्वत, गुह, सनत्कुमार भगवान भोग और मोक्ष दोनों देते हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सांसारिक भोग व अंतिम मोक्ष की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

सांसारिक भोग व अंतिम मोक्ष की प्राप्ति।

जप काल

ध्यान साधना के पूर्व।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र