शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद षष्ठी कवचम्
थुतिप्पोरक्कु वल्विणैपोम् तुन्बम्पोम् नेञ्जिल् पतिप्पोरक्कु सेल्वम् पलिथ्थुक्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारमंगलाचरण
स्वरूपषण्मुख (तमिल परंपरा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्तुति करने वालों के दुःख-पाप नष्ट होते हैं, और जो उन्हें हृदय में बसाते हैं, उनकी संपदा बढ़ती है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दरिद्रता, दुःख और पापों का नाश
विस्तृत लाभ
दरिद्रता, दुःख और पापों का नाश।
जप काल
षष्ठी के दिन नित्य पाठ।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ योगिनांपतये नमः
ॐ नमो आदेश गुरु को, सोने का कड़ा, तांबे का कड़ा, हनुमान वनगरेया सजे मोंढे आन खड़ा। शब्द सांचा पिंड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ शुभायै नमः
ॐ कमलप्रियायै नमः
जो महान तपस्वी महर्षि जमदग्नि के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पितृ-दोष शांति) 19।
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥