शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपविश्वरूप-धारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अर्जुन को अपना विराट (विश्वरूप) रूप दिखाने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विराट दृष्टि और ज्ञान
विस्तृत लाभ
विराट दृष्टि और ज्ञान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम गृह क्लेश निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्। अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ कल्पलतायै नमः
ॐ कबलीकृतमार्तण्डमण्डलाय नमः
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ।
ॐ यज्विने नमः