शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
आलिङ्ग्य देवीं हरितां निषण्णां परस्परश्लिष्ट कटौ निविश्य । सन्ध्यारुणं पाशसृणीं वहन्तं भयापहं शक्ति गणपतिमीडे ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शक्ति की प्राप्ति और हर प्रकार के भय से मुक्ति
विस्तृत लाभ
शक्ति की प्राप्ति और हर प्रकार के भय से मुक्ति।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...
ॐ कमलानन्दकर्त्र्यै नमः
श्रीहरिः पातु ते वक्त्रं मस्तकं मधुसूदनः । श्रीकृष्णश्चक्षुषी पातु नासिकां राधिकापतिः ॥
ॐ कृष्णप्राणाधिकायै राधायै नमः
एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुर् य इमांल्लोकानीशत ईशनीभिः।
ॐ विपुलांसाय नमः