शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपुष्टिदात्री मंत्र
स्वरूपपुष्करिणी/पिंगला
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे अग्नि! कमलों से युक्त, पुष्टि स्वरूपा, चंद्रमुखी स्वर्णमयी लक्ष्मी का मेरे लिए आवाहन करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शारीरिक पुष्टि, सुवर्ण प्राप्ति
विस्तृत लाभ
शारीरिक पुष्टि, सुवर्ण प्राप्ति।
जप काल
सूर्योदय के समय जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...
ॐ दुर्गतोद्धारिण्यै नमः
ॐ करुणार्णवसम्पूर्णायै नमः
ॐ सुग्रीवसचिवाय नमः
ॐ नं रीं नित्यतृप्तधाम्ने तत्पुरुषात्मने तर्जनीभ्यां नमः