शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अनन्तशक्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशक्तिमान
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अनंत शक्तियों के स्वामी को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अक्षय ऊर्जा और असीम संभावनाओं का द्वार
विस्तृत लाभ
अक्षय ऊर्जा और असीम संभावनाओं का द्वार।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कबन्धानन्तभूषितायै नमः
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
ॐ दुर्गमाश्रितायै नमः