शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अनूपमायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अनुपम सौंदर्य और माधुर्य वाली हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आंतरिक आकर्षण का विकास
विस्तृत लाभ
आंतरिक आकर्षण का विकास।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ नागाशनरथस्थिताय नमः
ॐ रसाधराय नमः
ॐ अधोक्षजाय नमः
सहस्राणि सहस्रशो ये रुद्रा अधि भूम्याम्। तेषां सहस्रयोजनेऽवधन्वानि तन्मसि॥
श्रीकृष्णः शरणं मम