शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारव्यापकता मंत्र
स्वरूपसर्वव्यापी / अंतर्यामी नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इस ब्रह्मांड में भीतर और बाहर जो कुछ भी है, नारायण उस सबको व्याप्त करके स्थित हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वत्र ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव और मन की असीम शुद्धि
विस्तृत लाभ
सर्वत्र ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव और मन की असीम शुद्धि 2।
जप काल
नित्य पूजा या संध्यावंदन के दौरान।
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