शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अपरिच्छेद्याय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअसीम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्हें किसी सीमा, देश या काल में बांधा नहीं जा सकता।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असीम सोच
विस्तृत लाभ
असीम सोच
जप काल
ध्यान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दुर्मदाय नमः
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर् यादोगणेभ्यो वरुणस्य पाशात्
ॐ क्वणत्काञ्चीविभूषणायै नमः
ॐ श्रीकृष्णरमण्यै राधायै नमः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ नित्यपुष्टायै नमः