मुख कमल वासिनी मन्त्र
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
मुख रूपी कमल पर निवास करने वाली, पापों का नाश करने वाली, हे वाग्वादिनी सरस्वती! आप मेरे मुख से बोलें (सत्य और ज्ञान बुलवाएं), आपको नमस्कार और आहुति है।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाणी में वशीकरण शक्ति का उदय, पूर्वकृत पाप कर्मों का क्षय, धन और परम ज्ञान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
वाणी में वशीकरण शक्ति का उदय, पूर्वकृत पाप कर्मों का क्षय, धन और परम ज्ञान की प्राप्ति।
जप काल
1 लाख बार जपने से वाक् सिद्धि होती है। जैन आगम परंपरा में भी यह मन्त्र मान्य है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ क्षेत्रदाय नमः।
हरि राम हरि राम, राम राम हरि हरि (Hari Ram Hari Ram, Rama Rama Hari Hari)
ॐ वकारसुखकलासंस्थाय नमः
ॐ लङ्कापुरविदाहकाय नमः
ॐ रक्तमालाविभूषाय नमः