शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारलक्ष्मी स्थिरीकरण मंत्र (श्लोक 11)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे स्वर्णमयी लक्ष्मी! आप यहाँ (मेरे घर में) बैठें, स्थिर हों, प्रेमपूर्वक सुस्थिर हों और प्रसन्न होकर वरदान दें 14।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चंचल लक्ष्मी का घर में दृढ़ता से टिकना
विस्तृत लाभ
चंचल लक्ष्मी का घर में दृढ़ता से टिकना 47।
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व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥