शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भद्रकाली मंत्र
भद्रकाली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअघोर / उग्र साधना मंत्र
स्वरूपभद्रकाली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मंगलकारी (भद्र) और संहारक (महाकाली) देवी सभी बाधाओं को नष्ट करें (फट्)।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
काल-भय से मुक्ति, घोर तंत्र-बाधा का नाश
विस्तृत लाभ
काल-भय से मुक्ति, घोर तंत्र-बाधा का नाश।
जप काल
अष्टमी या चतुर्दशी की रात्रि को।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अक्षराय नमः
ॐ प्रतापवते नमः
नमामि भार्गवं रामं रेणुकाचित्तनन्दनं। मोचिताम्बार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम्॥
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विशुद्धात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥