शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ भूतात्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी जीवों के भीतर बैठी हुई आत्मा
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्राणी मात्र से अहैतुकी प्रेम की भावना
विस्तृत लाभ
प्राणी मात्र से अहैतुकी प्रेम की भावना 22
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वद वद वाग्वादिनी स्वाहा। (अथवा ॐ नमो भगवती वद वद वाग्देवी स्वाहा)
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
जपतां कवचं नित्यं सर्वसौभाग्यपूरितम्। इति श्रीविष्णुयामले उपरिभागे जामदग्न्यदिव्याञ्जनसिद्धिकल्पे श्रीभार्गवकवचं सम्पूर्णम्॥
ॐ पीतवाससे नमः
ॐ मायामारीचहन्त्रे नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।