शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ दशबाहवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदश-भुजाधारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
दस भुजाओं वाले विराट तांत्रिक स्वरूप को धारण करने वाले भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता या च सुधूम्रवर्णा। स्फुलिङ्गिनी विश्वरुची च देवी लेलायमाना इति सप्त जिह्वाः॥
ॐ धीरोदात्ताय नमः
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यमक्षय्यं परमं शिवम्॥
इरचेवि हलयुम सेव्वाळ इयलपुडन काक्क वायकै
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥