ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ॐ, हम देवकीनन्दन को जानते हैं, उन वासुदेव का हम ध्यान करते हैं। वे श्रीकृष्ण हमारी प्रज्ञा (बुद्धि) को सन्मार्ग पर प्रेरित करें 30।
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार, बौद्धिक स्पष्टता (Illumination of mind), जीवन के कार्यों में सफलता और अज्ञानता का अन्धकार दूर होना
विस्तृत लाभ
उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार, बौद्धिक स्पष्टता (Illumination of mind), जीवन के कार्यों में सफलता और अज्ञानता का अन्धकार दूर होना 30।
जप काल
प्रातः एवं सन्ध्या काल में, गायत्री-छन्द के नियमानुसार।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।
ॐ भवसागरनाविकाय नमः
ॐ वर्णजपमालाविधायै नमः
ॐ क्लीं कृष्णाय राधिकायै श्रेयं नमः