शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ दुर्गनिहन्त्र्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कठिन परिस्थितियों और दुर्गुणों को बलपूर्वक नष्ट करती हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नवनिधिप्रदाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये द्वादशादित्याः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ शत्रुदर्पघ्नाय नमः
दक्षिणे चंड भैरवाय नमः दक्षिणे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ महानन्दाय नमः
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो अघोरघोरेतरेभ्यः। सर्वतः शर्वः सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्र रूपेभ्यः॥