शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ दुर्गार्तिशमन्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो दुर्गम पीड़ाओं और दुःखों को शांत करती हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अनघाय नमः
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
ॐ गुणाकराय नमः
ॐ माधवाय नमः