शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ द्विवर्णाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिव-शक्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
द्विवर्ण (प्रकृति-पुरुष) स्वरूप को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन में संतुलन और द्वंद्वों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
जीवन में संतुलन और द्वंद्वों से मुक्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥
ॐ चतुरात्मने नमः
ॐ वासुदेवाय वन्द्याय नमः
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
ॐ धूम्रवर्णाय हुं
ॐ सुवर्णदृष्ट्यै नमः