शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारलक्ष्मी कवच (हृदय-रक्षा मंत्र)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नासिका की महालक्ष्मी, कंठ की सरस्वती, भुजाओं की वरदा और हृदय की रक्षा सुंदरी देवी करें 45।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा
विस्तृत लाभ
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
प्राणश्च मेऽपानश्च मे व्यानश्च मे...
ॐ क्लीं देवाय नमः
ॐ भव्याय नमः
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
इरचेवि हलयुम सेव्वाळ इयलपुडन काक्क वायकै