शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
आनंद भैरव मंत्र
ह स ख म ल व र यूं आनंद भैरवाय स्वाहा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवामाचार बीज मंत्र
स्वरूपआनंद भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आनंद भैरव को मेरा समर्पण है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परमानंद की प्राप्ति और कुण्डलिनी जागरण
विस्तृत लाभ
परमानंद की प्राप्ति और कुण्डलिनी जागरण 7।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
ॐ ईशाय नमः
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः । ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥
ॐ भूतभावनाय नमः
ॐ वीरभद्राय नमः